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बकरी पालन ने नाजमा को बनाया ग्रामीण स्वावलंबन की मिसाल

उत्तर प्रदेश जैसे विशाल और कृषि-प्रधान राज्य में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रदेश सरकार निरंतर संवेदनशील और प्रयासशील है। राज्य के ग्रामीण एवं दूरदराज के इलाकों में रोजगार के नए अवसर सृजित करने, गरीबी उन्मूलन और समाज के कमजोर वर्गों, विशेषकर महिलाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार द्वारा संचालित ’’बकरी पालन योजना’’ एक युगांतकारी पहल साबित हो रही है। ग्रामीण परिवेश में बकरी नका रखरखाव बेहद आसान है, इसके पोषण के लिए कम संसाधनों की आवश्यकता होती है और यह न्यूनतम लागत में अधिकतम मुनाफा देने का एक विश्वसनीय साधन है। प्रदेश सरकार की इस दूरदर्शी योजना का प्राथमिक लक्ष्य सीमांत और लघु किसानों की आय में गुणात्मक वृद्धि करना तथा ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन को रोककर स्थानीय स्तर पर ही स्वरोजगार के बेहतरीन अवसर उपलब्ध कराना है, जिसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिलाओं को प्राथमिकता देकर समावेशी विकास की अवधारणा को साकार किया जा रहा है।
प्रदेश सरकार द्वारा इस महत्वाकांक्षी योजना को वैज्ञानिक और व्यावहारिक दृष्टिकोण से विभिन्न स्तरों पर लागू किया गया है, ताकि हर वर्ग का लाभार्थी अपनी क्षमता के अनुसार इसका लाभ उठा सके। राज्य में मुख्य रूप से दो प्रकार के मॉडल अत्यधिक लोकप्रिय हो रहे हैं। पहले मॉडल के तहत, सीमांत किसानों, भूमिहीन मजदूरों और घरेलू महिलाओं के लिए 10 बकरी और 1 बकरा अथवा 20 बकरी और 1 बकरा की लघु स्तरीय यूनिट स्थापित करने का प्रावधान है। वहीं, बड़े स्तर पर व्यावसायिक पशुपालन शुरू करने के इच्छुक उद्यमियों के लिए 100 बकरी और 5 बकरा की कमर्शियल यूनिट स्थापित करने हेतु भारी वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान किया जाता है। इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता इस पर प्रदेश सरकार द्वारा दी जाने वाली आकर्षक सब्सिडी है, जो लाभार्थियों पर पूंजीगत व्यय के बोझ को काफी हद तक कम कर देती है। योजना के अंतर्गत सामान्य वर्ग के लाभार्थियों को कुल लागत का लगभग 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है, जबकि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आवेदकों के लिए यह सब्सिडी 60 से 70 प्रतिशत तक निर्धारित की गई है। इसके अतिरिक्त, बची हुई आवश्यक धनराशि के लिए प्रदेश सरकार एवं जिला प्रशासन के समन्वय से नाबार्ड तथा स्थानीय बैंकों के माध्यम से बेहद आसान शर्तों पर ऋण उपलब्ध कराया जाता है, जिससे पूंजी के अभाव में कोई भी पात्र व्यक्ति इस लाभ से वंचित न रहे।
योजना की सफलता को सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश की जलवायु के अनुकूल और अधिक दूध व मांस का उत्पादन करने वाली उन्नत नस्लों के पालन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद और आसपास के क्षेत्रों के लिए अत्यधिक उपयुक्त मानी जाने वाली प्रसिद्ध ’बरबरी’ नस्ल को प्राथमिकता दी जा रही है। बरबरी नस्ल की बकरियां कम स्थान में आसानी से रह लेती हैं और साल में दो बार बच्चे देने की क्षमता रखती हैं, जिससे पशुपालक को तेजी से आर्थिक लाभ होता है। इसके अलावा, राज्य के विभिन्न क्षेत्रों की मांग के अनुसार दूध उत्पादन के लिए सर्वश्रेष्ठ ’जमुनापारी’ तथा मांस और दूध दोनों के लिए बेहतरीन मानी जाने वाली ’बीतल’ और ’सिराही’ जैसी नस्लों के संवर्धन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रदेश सरकार की नीति केवल वित्तीय सहायता देने तक सीमित नहीं है, अपितु पशुओं के समय पर टीकाकरण, स्वास्थ्य परीक्षण और वैज्ञानिक आहार प्रबंधन के लिए भी व्यापक तकनीकी सहायता निरंतर उपलब्ध कराई जाती है।
पारदर्शी और सरल आवेदन प्रक्रिया इस योजना की एक अन्य महत्वपूर्ण कड़ी है। प्रदेश सरकार के निर्देशानुसार, इस योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदन प्रक्रिया को पूरी तरह से सुगम और बाधारहित बनाया गया है। आवेदक का उत्तर प्रदेश का मूल निवासी होना तथा उसके पास बकरियों के सुरक्षित रखरखाव के लिए पर्याप्त स्थान होना अनिवार्य है। इच्छुक लाभार्थी को अपने आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, भूमि से संबंधित सामान्य दस्तावेज और बैंक पासबुक जैसे कागजातों के साथ जिला प्रशासन के माध्यम से संबंधित कार्यालयों में संपर्क करना होता है। आवेदन प्राप्त होने के उपरांत जिला प्रशासन द्वारा निष्पक्षता के साथ भूमि और पात्रता का त्वरित भौतिक सत्यापन किया जाता है, जिसके तत्काल बाद बैंक ऋण और अनुदान राशि के हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। यह पूरी प्रक्रिया प्रदेश सरकार की ’जीरो टॉलरेंस’ और पारदर्शिता की नीति को दर्शाती है।
प्रदेश सरकार की इस जनकल्याणकारी योजना का धरातल पर क्या प्रभाव पड़ रहा है, इसका सबसे उत्कृष्ट और जीवंत उदाहरण गाजियाबाद जनपद में देखने को मिला है। गाजियाबाद निवासी नाजमा के लिए प्रदेश सरकार की यह बकरी पालन योजना जीवन बदलने वाली संजीवनी साबित हुई है। एक समय था जब नाजमा और उनका परिवार आजीविका के लिए केवल दैनिक मजदूरी पर निर्भर था। आय के सीमित और अनिश्चित साधनों के कारण परिवार को दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति करने में भी भारी आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। ऐसे संघर्षपूर्ण समय में, जिला प्रशासन द्वारा चलाए गए जागरूकता अभियानों के माध्यम से नाजमा को प्रदेश सरकार की बकरी पालन योजना और उस पर मिलने वाले अनुदान के विषय में विस्तृत जानकारी प्राप्त हुई। उन्होंने इस अवसर को अपने जीवन का एक नया मोड़ बनाने का संकल्प लिया और योजना के तहत आवेदन कर अनुदान एवं ऋण प्राप्त किया।
जिला प्रशासन द्वारा समय से उपलब्ध कराई गई आर्थिक और तकनीकी सहायता के बल पर नाजमा ने वैज्ञानिक विधि से बकरी पालन का कार्य प्रारंभ किया। उन्होंने विशेष रूप से उन्नत नस्ल की बकरियों के प्रजनन और उनके स्वास्थ्य प्रबंधन पर गहन ध्यान केंद्रित किया। प्रदेश सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई निरंतर पशु चिकित्सा सेवाओं और मार्गदर्शन का परिणाम यह हुआ कि नाजमा की यूनिट में उत्तम गुणवत्ता वाले बकरे और बकरियां तैयार होने लगीं। गाजियाबाद और उसके आसपास के स्थानीय बाजारों में उन्नत नस्ल के इन पशुओं की भारी मांग रही, जिसके फलस्वरूप उन्हें बाजार में बहुत ही उचित और लाभकारी मूल्य प्राप्त हुआ। इस उद्यम से नाजमा की आय में निरंतर और अपूर्व वृद्धि होने लगी, जिसने उनके परिवार की आर्थिक नींव को सुदृढ़ कर दिया।
बकरी पालन से प्राप्त इस निरंतर और अतिरिक्त आय ने नाजमा के परिवार के सामाजिक और आर्थिक जीवन में एक ऐतिहासिक बदलाव ला दिया है। पहले जहाँ मजदूरी ही एकमात्र सहारा थी, वहीं अब यह सम्मानजनक व्यवसाय उनके परिवार की आय का मुख्य स्रोत बन चुका है। अपनी बढ़ी हुई आर्थिक क्षमता के कारण नाजमा ने अपने घर की बुनियादी जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा करने के साथ-साथ अपने बच्चों की उच्च एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर विशेष ध्यान देना शुरू कर दिया है। आज उनका परिवार सामाजिक और आर्थिक रूप से पहले की अपेक्षा कहीं अधिक सशक्त, खुशहाल और पूरी तरह से आत्मनिर्भर है। समाज में आज नाजमा को एक सफल महिला उद्यमी के रूप में पहचाना जा रहा है, जो महिला सशक्तिकरण का एक अनूठा उदाहरण है।
अपनी इस अभूतपूर्व सफलता का पूरा श्रेय नाजमा प्रदेश सरकार की कल्याणकारी नीतियों और जिला प्रशासन के पूर्ण सहयोग को देती हैं। उनका स्पष्ट मानना है कि यदि प्रदेश सरकार द्वारा इतनी आसान शर्तों पर वित्तीय सहायता और सतत मार्गदर्शन न प्रदान किया गया होता, तो इस स्तर की सफलता प्राप्त करना असंभव था। नाजमा की इस प्रेरक सफलता को देखकर गाजियाबाद के ग्रामीण परिवेश में एक नई व्यावसायिक क्रांति का सूत्रपात हुआ है। उनके इस सफल प्रयास से प्रेरणा लेकर गांव के कई अन्य परिवारों ने भी पारंपरिक खेती और मजदूरी के साथ-साथ बकरी पालन को स्वरोजगार के एक विश्वसनीय माध्यम के रूप में अपनाना शुरू कर दिया है। नाजमा के पड़ोसी श्री आमिर खान भी प्रदेश सरकार की इस योजना और नाजमा की सफलता से अत्यधिक प्रभावित हुए हैं। श्री आमिर खान ने अब स्वयं इस लाभकारी व्यवसाय से जुड़ने का निर्णय लिया है और वे जिला प्रशासन के माध्यम से प्रदेश सरकार की आगामी योजनाओं में भाग लेने के लिए अपनी पूरी तैयारी कर चुके हैं।
गाजियाबाद जनपद की नाजमा की यह प्रेरक कहानी इस तथ्य को पूर्णतः प्रमाणित करती है कि यदि प्रदेश सरकार की नीतियां जन-केंद्रित हों और जिला प्रशासन द्वारा उन्हें पूरी पारदर्शिता एवं तत्परता के साथ लागू किया जाए, तो सीमित संसाधनों वाले नागरिक भी गरीबी के दुष्चक्र से बाहर निकलकर आर्थिक स्वावलंबन के शिखर पर पहुँच सकते हैं। उत्तर प्रदेश सरकार की बकरी पालन योजना आज प्रदेश के हजारों परिवारों के लिए न केवल एक आर्थिक सुरक्षा कवच बन चुकी है, बल्कि यह ग्रामीण महिलाओं को समाज में एक नई पहचान और आत्मनिर्भरता प्रदान कर राज्य के समग्र विकास में ऐतिहासिक योगदान दे रही है।

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